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Yavan states of india |भारत के यवन राज्य| भारत के यवन राज्य पर MCQ|MCQ on Yavana Kingdom of India

Yavan states of india(भारत के यवन राज्य)

भारत के यवन राज्य: एक विस्तृत परिचय

"यवन" शब्द प्राचीन भारत में यूनानियों (ग्रीकों) के लिए प्रयुक्त होता था। भारत के यवन राज्य को इतिहास में इंडो-ग्रीक राज्य के नाम से जाना जाता है। यह राज्य लगभग 2nd शताब्दी ईसा पूर्व से लगभग 1st शताब्दी ईसा पूर्व तक उत्तर-पश्चिम भारत, अफगानिस्तान, और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में फैला हुआ था।

यह राज्य मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद हुआ और सिकंदर महान के पूर्ववर्तियों और उनके उत्तराधिकारियों (सेल्यूकिड वंश) के विस्तार के कारण भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में स्थापित हुआ। इंडो-ग्रीक राज्य ने भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक दिशा पर गहरा प्रभाव डाला।

 

यवन या इंडो-ग्रीक कौन थे?

  • यवन (Yavana) प्राचीन भारतीय ग्रंथों में ग्रीकों के लिए प्रयुक्त शब्द था।
  • सिकंदर महान के भारत आक्रमण (लगभग 326 ईसा पूर्व) के बाद, उसके सेनापतियों और उत्तराधिकारियों ने भारत के कुछ हिस्सों में शासन स्थापित किया।
  • सेल्यूकिड वंश से निकले जनरल, विशेषकर स्रेतस और फिर मेनंदर ने भारत में अपने क्षेत्र बनाए।
  • मेनंदर (Menander I) सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली Indo-Greek राजा थे।

यवन राज्य की स्थापना और विस्तार

  • मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद, पश्चिमी भारत और अफगानिस्तान में कई छोटे-छोटे राज्य बने।
  • सेल्यूकिड साम्राज्य के पश्चिमी हिस्से में कुछ समय के लिए युद्ध और सत्ता संघर्ष के बाद, यवनों ने भारत के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया।
  • यवन राज्य का केंद्र मुख्य रूप से पंजाब, सिंध, कश्मीर, और अफगानिस्तान के हिस्से थे।
  • इस राज्य ने हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों के साथ-साथ ग्रीक संस्कृति और धर्म का संगम किया।

यवन राज्य के प्रमुख शासक

मेनंदर प्रथम (Menander I) (लगभग 165-130 ई.पू.)

  • मेनंदर सबसे प्रसिद्ध Indo-Greek राजा था।
  • उसका शासनकाल महान था और उसने अपने राज्य का विस्तार किया।
  • उसने बौद्ध धर्म अपनाया और "मिलिन्द पञ्हा" नामक बौद्ध ग्रंथ में उसके संवादों का वर्णन मिलता है।
  • उसकी राजधानी के रूप में सिकंदरिया (आज के शकस्ल क्षेत्र) मानी जाती है।

अन्य प्रमुख शासक

  • एपिफ़ानस (Epiphanes)
  • एरियाकस (Euthydemus)
  • हिप्पोस (Hippostratos)
  • प्लाथियन (Platy)
  • एपिडेमियस (Apollodotus)


यवन राज्य की सांस्कृतिक विशेषताएँ

  • यवन राज्य में यूनानी कला और भारतीय कला का विलय हुआ, जिसे ग्रीको-बुद्धिस्ट कला कहा जाता है।
  • गांधार कला इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसमें ग्रीक मूर्तिकला के प्रभाव स्पष्ट दिखते हैं।
  • सिक्कों पर ग्रीक और भारतीय भाषाओं दोनों में अभिलेख मिलते हैं।
  • मंदिरों, स्तूपों, और मूर्तियों की कला में ग्रीक शैली के साथ भारतीय धार्मिक प्रतीक शामिल होते हैं।


यवन राज्य और धर्म

  • यवन शासकों में से कई ने बौद्ध धर्म को अपनाया और उसे बढ़ावा दिया।
  • मेनंदर और कुछ अन्य शासक बौद्ध धर्म के अनुयायी थे।
  • "मिलिन्द पञ्हा" (Milinda Panha) ग्रंथ में राजा मेनंदर और बौद्ध मुनि नागसेन के संवाद वर्णित हैं।
  • यवनों ने बौद्ध मठों और स्तूपों का संरक्षण किया।


आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था

  • यवन राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि, व्यापार, और शिल्पकला पर आधारित थी।
  • व्यापारिक मार्गों का नियंत्रण था, खासकर सिंधु और गंगा के बीच।
  • विदेशी व्यापार से यवन राज्य का आर्थिक बल बढ़ा।
  • प्रशासन में ग्रीक और भारतीय दोनों तत्वों का मेल था।

 

यवन राज्य का विस्तार

  • यवनों ने पंजाब, सिंध, कश्मीर, अफगानिस्तान के हिस्सों में अपने अधिकार स्थापित किए।
  • यवन राज्य का विस्तार हिमालय के तलहटी से लेकर सिंधु नदी के घाटी तक फैला हुआ था।
  • पश्चिमी सीमाएँ अफगानिस्तान तक थीं, जहां उन्होंने ग्रीक और स्थानीय शासकों के साथ सामरिक गठजोड़ बनाए।
  • सिकंदर महान के पूर्ववर्ती सेनापतियों ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के क्षेत्र में पहले ही कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था, जिन्हें यवनों ने आगे बढ़ाया।


यवन राज्य के युद्ध और सैन्य संघर्ष

यवन और भारतीय राज्यों के युद्ध

  • यवन राज्य ने उत्तर-पश्चिम भारत के कई छोटे-छोटे राज्यों और जनजातियों के साथ संघर्ष किया।
  • मौर्य और शुंग वंशों के बाद यह क्षेत्र अस्थिर था, जिससे यवनों को फौजदारी और राजनीतिक विस्तार का मौका मिला।
  • मेनंदर के युद्ध सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जिन्होंने पंजाब और उससे आगे क्षेत्रों पर कब्जा किया।

यवन और यवन के बीच संघर्ष

  • कई यवन शासकों के बीच सत्ता के लिए युद्ध होते रहे, जिससे यवन राज्य कमजोर होता गया।
  • यह आंतरिक कलह उनके पतन का एक बड़ा कारण थी।

यवन और कूशाण युद्ध

  • बाद में, कूशाणों के उदय के साथ यवनों ने उनका सामना किया।
  • कूशाणों ने यवनों को धीरे-धीरे हराकर उनके क्षेत्रों को अपने अधीन किया।

यवन राज्य का पतन

  • आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और शासकों के बीच द्वेष।
  • कूशाणों और अन्य बाहरी आक्रमणकारियों के हमलों से यवन राज्य कमजोर पड़ा।
  • 1st शताब्दी ईसा पूर्व तक यवन राज्य लगभग समाप्त हो गया।
  • हालांकि, यवन संस्कृति और कला ने क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ा।


यवन राज्य का ऐतिहासिक महत्व

सांस्कृतिक संगम

  • भारतीय और यूनानी संस्कृतियों का विलय यवन राज्य के दौरान हुआ।
  • गांधार और मद्रास कला ने ग्रीक शैली और भारतीय धार्मिक विषयों को मिलाकर एक अनूठी कला शैली विकसित की।

धार्मिक योगदान

  • कई यवन शासकों ने बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया।
  • "मिलिन्द पञ्हा" में मेनंदर का बौद्ध मुनि नागसेन से संवाद इस बात का प्रमाण है।

आर्थिक विकास

  • यवन राज्य ने व्यापार मार्गों को सुरक्षित किया, जिससे भारत और मध्य एशिया के बीच आर्थिक आदान-प्रदान बढ़ा।

सिक्का प्रणाली

  • यवन राज्य ने अपने सिक्कों पर यूनानी और भारतीय दोनों भाषाओं का उपयोग किया।
  • सिक्कों पर यूनानी देवी-देवताओं के चित्र और भारतीय देवताओं के प्रतीक मिलते हैं।


यवन राज्य की कला और स्थापत्य

  • गांधार कला का उद्भव यवन शासनकाल में हुआ।
  • ग्रीक मूर्तिकला शैली में बुद्ध के प्रतिमाएँ बनाई गईं, जिनमें यूनानी कला के प्रभाव स्पष्ट हैं।
  • स्तूप और मंदिरों का निर्माण हुआ।
  • इस कला का प्रभाव बाद में भारतीय कला और मुगल कला पर भी पड़ा।


"मिलिन्द पञ्हा" (Milinda Panha)

  • यह बौद्ध ग्रंथ मेनंदर (मिलिंद) और बौद्ध मुनि नागसेन के संवादों का संग्रह है।
  • इसमें दर्शन, धर्म, नीति, और जीवन के गहरे प्रश्नों पर चर्चा होती है।
  • यह ग्रंथ बौद्ध धर्म और यूनानी तर्कशास्त्र के मेल का उदाहरण है।


भारत के यवन राज्य ने प्राचीन भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक, और राजनीतिक धारा को गहराई से प्रभावित किया। यवनों ने भारतीय उपमहाद्वीप में यूनानी संस्कृति का प्रचार किया और भारतीय संस्कृति के साथ एक समृद्ध संगम स्थापित किया। हालांकि उनका राज्य सीमित समय तक चला, उनकी विरासत आज भी कला, धर्म, और इतिहास में जीवित है।

 

यवन राज्य के सिक्के (Coins)

  • यवन शासकों ने अपने शासन को मजबूत करने और पहचान बनाने के लिए सिक्के जारी किए।
  • इन सिक्कों पर यूनानी और भारतीय दोनों भाषाओं में लेख पाए जाते हैं, जो इस सांस्कृतिक मिश्रण का प्रमाण हैं।
  • अधिकांश सिक्कों पर ग्रीक देवताओं और राजा के चित्र बने होते थे।
  • मेनंदर प्रथम के सिक्के सबसे प्रसिद्ध हैं, जिन पर उनका नाम ग्रीक में "BASILEOS SOTEROS MENANDROU" (राजा मेनंदर, उद्धारकर्ता) लिखा होता है।
  • सिक्कों की कला और अभिलेख शिल्प में उच्च स्तर की योग्यता प्रदर्शित करते हैं।
  • सिक्कों पर बौद्ध प्रतीक भी मिलते हैं जैसे कि स्तूप, त्रिशूल, और पद्म।


यवन राज्य के साहित्यिक और ऐतिहासिक स्रोत

मिलिन्द पञ्हा (Milinda Panha)

  • यह बौद्ध ग्रंथ राजा मेनंदर और बौद्ध मुनि नागसेन के संवादों का संग्रह है।
  • इसमें तर्कशास्त्र, धर्म, नैतिकता और जीवन के दर्शन पर चर्चा होती है।
  • यह ग्रंथ भारत में यूनानी तर्कशास्त्र के प्रभाव का उदाहरण है।

पनिनि का उल्लेख

  • संस्कृत व्याकरणाचार्य पाणिनि ने यवनों का उल्लेख अपने ग्रंथों में किया है।
  • उन्होंने यवनों को एक विदेशी और प्रभावशाली समुदाय के रूप में वर्णित किया है।

ग्रेकरों के लेखक और इतिहासकार

  • डियोडोरस सिकुलस और स्ट्रैबो जैसे ग्रीक इतिहासकारों ने यवन और उनके भारत में अभियान का उल्लेख किया है।
  • स्ट्रैबो ने भारत की भूगोल और यवन राज्य की स्थिति का वर्णन किया है।

चीनी यात्रियों के विवरण

  • फ़ाहियान और ह्वेनसांग जैसे चीनी भिक्षुओं ने अपने यात्रा वृत्तांतों में यवनों और उनके राज्य का उल्लेख किया।


यवन राज्य के प्रमुख शहर और नगरीय केंद्र

सिकंदरिया (Alexandria of the Caucasus)

  • यह यवन राज्य की राजधानी मानी जाती थी।
  • आधुनिक अफगानिस्तान के बागलान क्षेत्र में स्थित।
  • यह शहर व्यापार, प्रशासन और सैन्य गतिविधियों का केंद्र था।

टाक्सिला (Taxila)

  • प्राचीन शिक्षा और व्यापार केंद्र।
  • यूनानी और भारतीय संस्कृति का संगम था।
  • कई प्रसिद्ध गुरुकुल और विश्वविद्यालय यहीं थे।

पुरुश्पुरा (Pushkalavati)

  • आधुनिक पाकिस्तान के चरसदा क्षेत्र में स्थित।
  • यवन शासन के दौरान महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र था।

कांडहार (Kandahar)

  • आज के अफगानिस्तान में स्थित।
  • ग्रीक और भारतीय शैलियों का संगम।


यवन राज्य की विरासत

  • यवन राज्य ने भारतीय उपमहाद्वीप में ग्रीक कला, धर्म, और प्रशासनिक प्रणाली का परिचय कराया।
  • गांधार कला और स्थापत्य में यवनों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
  • बौद्ध धर्म के संरक्षण में यवन शासकों ने अहम् भूमिका निभाई।
  • सिक्का प्रणाली और प्रशासनिक पद्धतियों ने बाद के भारतीय शासकों को प्रभावित किया।
  • यवन शासकों के उदारवादी और सांस्कृतिक दृष्टिकोण ने भारत में बहुसांस्कृतिक समाज के विकास को प्रोत्साहित किया।

यवन राज्य ने इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका शासन सीमित समय का था, लेकिन उनके द्वारा स्थापित सांस्कृतिक और धार्मिक आदान-प्रदान ने भारतीय सभ्यता को समृद्ध किया। वे भारतीय इतिहास में विदेशी प्रभाव के सकारात्मक उदाहरणों में से एक हैं, जिन्होंने कला, धर्म, और प्रशासनिक स्तर पर स्थायी छाप छोड़ी।


Note:- 

  • भारत पर आक्रमण करनेवाले विदेशी आक्रमणकारियों का क्रम है-हिन्द यूनानी शक -पहल्व ,कुषाण  
  • सेल्यूकस के द्वारा स्थापित पश्चिमी तथा मध्य एशिया के विशाल साम्राज्य को इसके उत्तराधिकारी एन्टिओकस प्रथम ने अक्षुण्ण बनाए रखा। 
  • एन्टिओकस-II के शासनकाल में विद्रोह के फलस्वरूप उसके अनेक प्रांत स्वतंत्र हो गए।
  • बैक्ट्रिया के विद्रोह का नेतृत्व डियोडोट्स प्रथम ने किया था। बैक्ट्रिया पर डियोडोट्स प्रथम के साथ इन राजाओं ने क्रमशः शासन किया-डियोडोट्स-II, यूथिडेमस्, डेमिट्रियस, मिनाण्डर, युक्रेटाइडस, एण्टी आलकीडस तथा हम्मिक्स ।
  • भारत पर सबसे पहले आक्रमण बैक्ट्रिया के शासक डेमिट्रियस ने किया। इसने 190 ईसा पूर्व में भारत पर आक्रमण कर अफगानिस्तान, पंजाब एवं सिंध के बहुत बड़े भाग पर अधिकार कर लिया। इसने शाकल को अपनी राजधानी बनायी। इसे ही हिन्द-यूनानी या बैक्ट्रियाई यूनानी कहा गया।
  • हिन्द-यूनानी शासकों में सबसे अधिक विख्यात मिनान्डर (165-145 ईसा पूर्व)हुआ। इसकी राजधानी शाकल (आधुनिक सियालकोट) शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था।
  • मिनान्डर ने नागसेन (नागार्जुन) से बौद्ध धर्म की दीक्षा ली।
  • मिनान्डर के प्रश्न एवं नागसेन द्वारा दिए गए उत्तर एक पुस्तक के रूप में संगृहीत हैं, जिसका नाम मिलिन्दपन्हो अर्थात् मिलिंद के प्रश्न या मिलिन्दप्रश्न' है।
  • हिन्द-यूनानी भारत के पहले शासक हुए जिनके जारी किये सिक्कों के बारे में निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि सिक्के किन- किन राजाओं के हैं।
  • भारत में सबसे पहले हिन्द-यूनानियों ने ही सोने के सिक्के जारी किये।
  • हिन्द-यूनानी शासकों ने भारत के पश्चिमोत्तर सीमा-प्रांत में यूनान की प्राचीन कला चलाई, जिसे हेलेनिस्टिक आर्ट कहते हैं। भारत में गंधार कला इसका उत्तम उदाहरण है।
  • नोट : यूनानियों ने परदे का प्रचलन आरंभ कर भारतीय नाट्यकला के विकास में योगदान किया। चूँकि परदा यूनानियों की देन था इसलिए वह यवनिका के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

 

 भारत के यवन राज्य पर MCQ

यवन’ शब्द का प्राचीन भारत में किसके लिए उपयोग होता था?
A)
पारसियों के लिए
B)
यूनानियों (ग्रीकों) के लिए
C)
मंगोलों के लिए
D)
अरबों के लिए
उत्तर: B


भारत में यवन राज्य की स्थापना कब हुई थी?
A) 4th
शताब्दी ईसा पूर्व
B) 2nd
शताब्दी ईसा पूर्व
C) 5th
शताब्दी ईसा पूर्व
D) 1st
शताब्दी ईसा पूर्व
उत्तर: B


भारत के यवन राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक कौन था?
A)
एपिडेमियस
B)
मेनंदर प्रथम
C)
अग्निमित्र
D)
धनवन्ति
उत्तर: B


मेनंदर प्रथम ने कौन सा धर्म अपनाया था?
A)
जैन धर्म
B)
हिंदू धर्म
C)
बौद्ध धर्म
D)
ज़ोरास्ट्रियन धर्म
उत्तर: C


मिलिन्द पञ्हा ग्रंथ में मेनंदर किससे संवाद करते हैं?
A)
महावीर
B)
नागसेन मुनि
C)
गौतम बुद्ध
D)
पतंजलि
उत्तर: B


यवन राज्य की राजधानी कहाँ थी?
A)
पाटलिपुत्र
B)
सिकंदरिया (Alexandria of the Caucasus)
C)
टाक्सिला
D)
कांडहार
उत्तर: B


गांधार कला किस राज्य के दौरान विकसित हुई थी?
A)
मौर्य साम्राज्य
B)
शुंग साम्राज्य
C)
यवन राज्य
D)
गुप्त साम्राज्य
उत्तर: C


यवन राज्य के सिक्कों पर कौन सी भाषाएँ लिखी जाती थीं?
A)
केवल ग्रीक
B)
केवल संस्कृत
C)
ग्रीक और प्राकृत/पालि
D)
केवल लैटिन
उत्तर: C


भारत में यवनों का उल्लेख सबसे पहले किस ग्रंथ में मिलता है?
A)
महाभारत
B)
रामायण
C)
पाणिनि के व्याकरण में
D)
अष्टाध्यायी
उत्तर: C


यवन राज्य किस क्षेत्र में स्थापित था?
A)
दक्षिण भारत
B)
उत्तर-पश्चिम भारत और अफगानिस्तान के कुछ हिस्से
C)
पूर्वी भारत
D)
मध्य भारत
उत्तर: B


यवनों ने किस विदेशी साम्राज्य से भारत में प्रवेश किया?
A)
रोमन साम्राज्य
B)
सेल्यूकिड साम्राज्य
C)
मंगोल साम्राज्य
D)
अक्काद साम्राज्य
उत्तर: B


कौन से चीनी यात्री ने यवन राज्य का उल्लेख किया है?
A)
ह्वेनसांग
B)
फाहियान
C)
ज़ुआनज़ांग
D)
लियू चांग
उत्तर: B


यवनों ने किस प्रसिद्ध भारतीय विश्वविद्यालय को अपना शिक्षा केंद्र बनाया?
A)
नालंदा
B)
तक्षशिला
C)
विक्रमशिला
D)
उज्जैन विश्वविद्यालय
उत्तर: B


यवनों के शासनकाल के दौरान बौद्ध धर्म के संरक्षण के लिए कौन सा प्रमुख स्तूप बनाया गया?
A)
सारनाथ स्तूप
B)
सांची स्तूप
C)
भरहुत स्तूप
D)
जयपुर स्तूप
उत्तर: C


यवन राज्य के पतन के बाद भारत में किस वंश का उदय हुआ?
A)
मौर्य वंश
B)
गुप्त वंश
C)
कूशाण वंश
D)
शुंग वंश
उत्तर: C


यवन राज्य में सेना की मुख्य शाखाएं कौन-सी थीं?
A)
केवल पैदल सेना
B)
केवल अश्व सेना
C)
पैदल सेना, अश्व सेना, और हाथी सेना
D)
केवल तीरंदाजी सेना
उत्तर: C


यवन शासकों ने अपने सिक्कों पर किस देवी-देवता के चित्र अंकित किए?
A)
केवल भारतीय देवता
B)
केवल यूनानी देवता
C)
यूनानी और भारतीय देवताओं के चित्र
D)
कोई नहीं
उत्तर: C


मेनंदर प्रथम के सिक्कों पर किस शब्द का उल्लेख मिलता है?
A)
राजा मेनंदर, उद्धारकर्ता (Basileos Soteros Menandrou)
B)
महान योद्धा
C)
पवित्र राजा
D)
विजेता शासक
उत्तर: A


मिलिन्द पञ्हा में मेनंदर का क्या उपनाम है?
A)
राजा
B)
मिलिन्द
C)
यवनराज
D)
उद्धारकर्ता
उत्तर: B


भारत में यवनों के शासनकाल में किस कला शैली का विकास हुआ?
A)
मौर्य कला
B)
गांधार कला
C)
गुप्त कला
D)
मीनाक्षी कला
उत्तर: B


यवन राज्य के सिक्कों पर प्रायः कौन सी भाषा के साथ ग्रीक भाषा का प्रयोग होता था?
A)
हिंदी
B)
संस्कृत
C)
प्राकृत
D)
तमिल
उत्तर: C


किस यवन शासक का उल्लेख ‘मिलिन्द पञ्हा’ में मिलता है?
A)
एपिफ़ानस
B)
मेनंदर प्रथम
C)
एपिडेमियस
D)
अग्निमित्र
उत्तर: B


यवनों का भारत के किन भागों में प्रभाव सबसे अधिक था?
A)
दक्षिण भारत
B)
उत्तर-पश्चिम भारत और सिंधु घाटी
C)
पूर्वी भारत
D)
गंगा घाटी
उत्तर: B


यवन राज्य किस विदेशी शासकों की उत्तराधिकार में स्थापित हुआ?
A)
मौर्य
B)
सेल्यूकिड
C)
कूशाण
D)
गुप्त
उत्तर: B


टाक्सिला शहर के लिए यवन कालीन प्रमुखता का कारण क्या था?
A)
सैन्य किला
B)
शिक्षा और व्यापार केंद्र
C)
धार्मिक तीर्थ स्थल
D)
कृषि उत्पादन केंद्र
उत्तर: B


यवनों ने किस धार्मिक ग्रंथ के संरक्षण में भूमिका निभाई?
A)
वेद
B)
मिलिन्द पञ्हा
C)
महाभारत
D)
रामायण
उत्तर: B


यवन शासकों ने किस कला पर सबसे अधिक प्रभाव डाला?
A)
मौर्य मूर्तिकला
B)
गांधार कला
C)
राजपूत चित्रकला
D)
मीनाक्षी मूर्तिकला
उत्तर: B


यवन राज्य में सिक्का प्रणाली का क्या महत्व था?
A)
केवल व्यापार के लिए
B)
केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए
C)
प्रशासनिक पहचान और आर्थिक व्यवस्था के लिए
D)
केवल सैन्य भत्ता देने के लिए
उत्तर: C


मेनंदर प्रथम ने किस प्रकार का संवाद ग्रंथ लिखा?
A)
युद्ध नीति
B)
धार्मिक और दार्शनिक संवाद
C)
आर्थिक नीतियाँ
D)
शासन व्यवस्था
उत्तर: B


यवन राज्य के पतन के प्रमुख कारण क्या थे?
A)
प्राकृतिक आपदाएँ
B)
आंतरिक कलह और कूशाणों के आक्रमण
C)
विदेशी आक्रमण नहीं हुआ
D)
आर्थिक समृद्धि
उत्तर: B


किस चीनी यात्री ने यवन राज्य का वर्णन किया?
A)
ज़ुआनज़ांग
B)
फाहियान
C)
ह्वेनसांग
D)
मेनदू
उत्तर: B


भारत में यवन राज्य ने किस प्रकार का धार्मिक सहिष्णुता दिखाया?
A)
केवल अपने धर्म को थोपना
B)
विभिन्न धर्मों को संरक्षण और सहिष्णुता
C)
सभी धर्मों को दबाना
D)
केवल हिंदू धर्म को प्रोत्साहित करना
उत्तर: B


यवनों के शासनकाल में किस धर्म के स्तूपों का निर्माण हुआ?
A)
हिंदू धर्म
B)
बौद्ध धर्म
C)
जैन धर्म
D)
ज़ोरास्ट्रियन धर्म
उत्तर: B


यवन राज्य ने किस विदेशी साम्राज्य के साथ व्यापार किया था?
A)
रोमन साम्राज्य
B)
मंगोल साम्राज्य
C)
सेल्यूकिड साम्राज्य
D)
कोई नहीं
उत्तर: A


यवन राज्य की राजधानी सिकंदरिया वर्तमान में कहाँ स्थित है?
A)
पाकिस्तान
B)
भारत
C)
अफगानिस्तान
D)
नेपाल
उत्तर: C


यवन राज्य के किस शासक को "सोतيروس" (उद्धारकर्ता) कहा गया?
A)
मेनंदर प्रथम
B)
एपिफ़ानस
C)
अग्निमित्र
D)
एपिडेमियस
उत्तर: A


भारत में यवन राज्य का पतन कब हुआ?
A) 1st
शताब्दी ईसा पूर्व
B) 5th
शताब्दी ईसा पूर्व
C) 3rd
शताब्दी ईसा पूर्व
D) 2nd
शताब्दी ईसा पूर्व
उत्तर: A


गांधार कला में यवनों का प्रमुख योगदान क्या था?
A)
स्थापत्य कला
B)
युद्धकला
C)
कृषि व्यवस्था
D)
भाषा विकास
उत्तर: A


यवन राज्य के सिक्कों में किस देवता के चित्र मिलते हैं?
A) Zeus (
यूनानी देवता)
B)
शिव
C)
विष्णु
D)
ब्रह्मा
उत्तर: A


मेनंदर प्रथम का शासनकाल किस शताब्दी में था?
A) 3rd
शताब्दी ईसा पूर्व
B) 2nd
शताब्दी ईसा पूर्व
C) 1st
शताब्दी ईसा पूर्व
D) 4th
शताब्दी ईसा पूर्व
उत्तर: B


यवन राज्य ने भारत में किस प्रकार की संस्कृति को बढ़ावा दिया?
A)
केवल भारतीय संस्कृति
B)
केवल यूनानी संस्कृति
C)
यूनानी-भारतीय सांस्कृतिक संगम
D)
फारसी संस्कृति
उत्तर: C


मिलिन्द पञ्हा’ किस भाषा में लिखा गया था?
A)
ग्रीक
B)
पालि
C)
संस्कृत
D)
प्राकृत
उत्तर: B


यवन राज्य के समय किस विदेशी कला का भारतीय मूर्तिकला में प्रभाव पड़ा?
A)
रोमन कला
B)
यूनानी कला
C)
मंगोल कला
D)
फारसी कला
उत्तर: B


भारत में यवनों ने किस प्रकार के सिक्के जारी किए?
A)
तांबे के सिक्के
B)
सोने के सिक्के
C)
चाँदी के सिक्के
D)
जस्ता के सिक्के
उत्तर: C


यवन राज्य के प्रमुख युद्ध किसके खिलाफ हुए थे?
A)
मौर्य साम्राज्य
B)
स्थानीय भारतीय राज्यों और बाद में कूशाणों के खिलाफ
C)
रोमन साम्राज्य
D)
गुप्त साम्राज्य
उत्तर: B


भारत के यवन राज्य ने किस तरह की शासन प्रणाली अपनाई?
A)
राजतंत्र
B)
गणतंत्र
C)
साम्राज्य
D)
कोई नहीं
उत्तर: A


यवनों के कला-संस्कृति में किस धार्मिक प्रतीक का उपयोग हुआ?
A)
केवल हिंदू प्रतीक
B)
बौद्ध प्रतीक जैसे स्तूप, पद्म
C)
ईसाई प्रतीक
D)
जैन प्रतीक
उत्तर: B


यवन राज्य में किस प्रकार की सैन्य तकनीक विकसित हुई?
A)
केवल पैदल सेना
B)
अश्व सेना और युद्ध हाथी
C)
आधुनिक तोपखाने
D)
केवल तीरंदाजी
उत्तर: B


भारत में यवन राज्य की स्थापना किसके बाद हुई?
A)
मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद
B)
गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद
C)
शुंग साम्राज्य के पतन के बाद
D)
कोई नहीं
उत्तर: A


भारत के यवन राज्य की सबसे प्रमुख सांस्कृतिक धरोहर कौन सी है?
A)
मौर्य स्तूप
B)
गांधार कला
C)
गुप्त चित्रकला
D)
राजस्थान की हवेलियाँ
उत्तर: B