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Vakataka Dynasty |वाकाटक राजवंश|

Vakataka Dynasty (वाकाटक राजवंश)

वाकाटक राजवंश : इतिहास, उद्भव और पृष्ठभूमि

भारत के प्राचीन इतिहास में वाकाटक राजवंश एक ऐसे राजनीतिक और सांस्कृतिक सेतु के रूप में जाना जाता है जिसने उत्तर के शक्तिशाली गुप्त साम्राज्य और दक्षिण के पल्लव साम्राज्य के बीच संबंधों को मजबूत किया। लगभग तीसरी शताब्दी ईस्वी के मध्य से पाँचवीं शताब्दी ईस्वी के अंत तक इस वंश का प्रभाव मध्य और दक्षिण भारत के विशाल भूभाग पर रहा।
वाकाटक न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थे, बल्कि कला, साहित्य और धर्म के संरक्षण में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया।

 

उद्भव और स्थापना

वाकाटक राजवंश का उद्भव सातवाहन साम्राज्य के पतन के बाद हुआ। जब सातवाहन सत्ता कमजोर हुई, तो विदर्भ और आस-पास के क्षेत्रों में नई शक्तियाँ उभरने लगीं। इन्हीं में से एक शक्ति थी वाकाटक राजवंश, जिसके संस्थापक विंध्यशक्ति माने जाते हैं।

  • विंध्यशक्ति का शासन काल लगभग 250 ईस्वी के आसपास माना जाता है।
  • उनके नाम से प्रतीत होता है कि वे विंध्याचल क्षेत्र के शक्ति-उपासक रहे होंगे।
  • प्रारंभिक राजधानी नंदिवर्धन (वर्तमान नागपुर के समीप) थी।


भौगोलिक स्थिति

वाकाटक साम्राज्य का विस्तार विदर्भ, महाकौशल, बुंदेलखंड, तेलंगाना और उत्तरी आंध्र प्रदेश तक फैला था।

  • उत्तर में नर्मदा नदी तक,
  • दक्षिण में कृष्णा नदी तक,
  • पश्चिम में मालवा और कोंकण क्षेत्र,
  • पूर्व में उड़ीसा की सीमा तक उनका प्रभाव था।

राजधानी समय-समय पर बदलती रही — नंदिवर्धन और वासिम (वर्धन) प्रमुख केंद्र रहे।


गुप्त साम्राज्य से संबंध

वाकाटक राजवंश ने गुप्त साम्राज्य के साथ न केवल राजनीतिक मित्रता बल्कि वैवाहिक संबंध भी स्थापित किए।
गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय ने अपनी पुत्री प्रभावती गुप्ता का विवाह वाकाटक नरेश रुद्रसेन द्वितीय से किया। इस संबंध ने दोनों राजवंशों को परस्पर सहयोग का अवसर दिया।
इस गठबंधन के कारण वाकाटक साम्राज्य को उत्तर भारत की संस्कृति, प्रशासनिक पद्धतियों और सैन्य शक्ति का लाभ मिला।


शाखाओं में विभाजन

वाकाटक साम्राज्य समय के साथ दो प्रमुख शाखाओं में बँट गया —

1. नंदिवर्धन शाखा (विदर्भ केंद्रित) — गुप्त साम्राज्य के साथ अधिक घनिष्ठ संबंध।

2. वासिम शाखा (बरार क्षेत्र) — दक्षिण भारत के राज्यों के साथ अधिक संपर्क।

दोनों शाखाओं ने स्वतंत्र रूप से अपने-अपने क्षेत्रों में शासन किया, लेकिन सांस्कृतिक धारा समान रही।

 

ऐतिहासिक स्रोत

वाकाटक इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए मुख्य स्रोत हैं —

  • शिलालेख — अजंता, मांडल, अमरावती और वर्धा क्षेत्र के अभिलेख।
  • साहित्यिक प्रमाण — पुराण, कालिदास के ग्रंथ, बाणभट्ट के वर्णन।
  • पुरातात्विक अवशेष — अजंता की गुफाएँ (विशेष रूप से गुफा संख्या 16 और 17) जिनमें वाकाटक काल की अद्वितीय चित्रकला और वास्तुकला दृष्टिगोचर होती है।

 

वाकाटक राजवंश : प्रमुख शासक, कालक्रम और उपलब्धियाँ

कालक्रम और प्रमुख शासक

वाकाटक राजवंश की राजनीतिक शक्ति का उत्थान और विस्तार उनके सक्षम शासकों के कारण हुआ। नीचे प्रमुख शासकों का क्रम दिया गया है —

 

विंध्यशक्ति (Vindhyashakti) – संस्थापक

  • शासन काल : लगभग 250 ईस्वी – 270 ईस्वी
  • इनके बारे में प्रत्यक्ष अभिलेख सीमित हैं, लेकिन पुराणों में इनके राज्य का उल्लेख मिलता है।
  • इन्हीं के नाम से वंश की पहचान “वाकाटक” के रूप में हुई।
  • विदर्भ क्षेत्र पर प्रभुत्व स्थापित किया।
  • राजधानी — नंदिवर्धन


प्रभाकरसेन प्रथम (Pravarasena I)

  • शासन काल : 270 ईस्वी – 330 ईस्वी
  • वाकाटक राजवंश के सर्वाधिक शक्तिशाली शासक
  • उन्होंने “सम्राट” की उपाधि धारण की, जो गुप्त सम्राटों के समान थी।
  • चार अश्वमेध यज्ञ, राजसूय यज्ञ और अग्निष्टोम यज्ञ संपन्न करवाए।
  • राज्य का विस्तार नर्मदा से लेकर दक्षिण में कृष्णा नदी तक किया।
  • इनके शासन में वाकाटक साम्राज्य का स्वर्ण युग माना जाता है।
  • मृत्यु के बाद साम्राज्य दो शाखाओं — नंदिवर्धन शाखा और वासिम शाखा — में बँट गया।


शाखाओं के प्रमुख शासक

A. नंदिवर्धन शाखा (विदर्भ केंद्र)

रुद्रसेन द्वितीय (Rudrasena II)

  • शासन काल : 380 ईस्वी – 385 ईस्वी
  • गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री प्रभावती गुप्ता से विवाह किया।
  • गुप्त साम्राज्य से घनिष्ठ संबंध स्थापित हुए।
  • इनके निधन के बाद प्रभावती गुप्ता ने अपने नाबालिग पुत्रों की ओर से लगभग 20 वर्षों तक शासन किया।

प्रभाकरसेन द्वितीय (Pravarasena II)

  • शासन काल : 410 ईस्वी – 440 ईस्वी
  • संस्कृत साहित्यकार, जिन्होंने सेतुबन्ध नामक महाकाव्य लिखा।
  • राजधानी को नंदिवर्धन से प्रवरपुर (संभवतः पौनार के पास) स्थानांतरित किया।
  • अजंता की कई गुफाओं के निर्माण में संरक्षण दिया।

वासिम शाखा (बरार क्षेत्र)


सार्वभौम (Sarvasena)

  • प्रसिद्ध कवि, जिन्होंने हर्षचरित जैसे संस्कृत ग्रंथ लिखे।
  • दक्षिण में पल्लव और चालुक्य शक्तियों से संपर्क बढ़ाया।


हर्षसेन (Harishena)

  • शासन काल : 460 ईस्वी – 490 ईस्वी
  • कला और वास्तुकला के महान संरक्षक।
  • अजंता की प्रसिद्ध गुफाओं (गुफा संख्या 16 और 17) के निर्माण का श्रेय इन्हें दिया जाता है।
  • इनके शासन में साम्राज्य का सांस्कृतिक उत्कर्ष चरम पर था।


राजनीतिक और सैन्य उपलब्धियाँ

1. विस्तार नीति — नर्मदा घाटी से लेकर कृष्णा नदी तक साम्राज्य का विस्तार।

2. गुप्त साम्राज्य से गठबंधन — वैवाहिक संबंधों के माध्यम से राजनीतिक स्थिरता प्राप्त की।

3. दक्षिण भारत में प्रभाव — पल्लव, चालुक्य और अन्य दक्षिणी शक्तियों से संपर्क।

4. धार्मिक संरक्षण — वैदिक यज्ञ, वैष्णव और बौद्ध कला का समर्थन।


सांस्कृतिक योगदान

  • अजंता की भित्तिचित्र कला, जिसमें बौद्ध जातक कथाओं का अद्भुत चित्रण है।
  • संस्कृत साहित्य को संरक्षण — कवि सार्वभौम और प्रभाकरसेन द्वितीय का योगदान।
  • धर्म और कला का अद्वितीय संगम।

 

वाकाटक राजवंश : प्रशासन, समाज, धर्म, कला और पतन

प्रशासनिक व्यवस्था

राजसत्ता

  • वाकाटक राजाओं के पास पूर्ण राजकीय अधिकार थे।
  • राजा को धर्मराज और सम्राट की उपाधि दी जाती थी।
  • शासन वंशानुगत था और ज्येष्ठ पुत्र को उत्तराधिकारी माना जाता था।

राज्य का विभाजन

  • साम्राज्य को देश (प्रदेश) में विभाजित किया गया था।
  • प्रत्येक देश के अंतर्गत कई विशय (जिले) आते थे।
  • जिले के प्रमुख को विशयपति कहा जाता था।
  • ग्राम प्रशासन ग्रामिक (ग्राम प्रधान) द्वारा संभाला जाता था।

राजस्व व्यवस्था

  • भूमि कर मुख्य आय का स्रोत था।
  • कर की दर भूमि की उपज और सिंचाई की स्थिति पर निर्भर थी।
  • व्यापार और शिल्प पर भी कर वसूला जाता था।

सैन्य व्यवस्था

  • सेना में पैदल, अश्वारोही और रथों के साथ-साथ हाथियों का भी उपयोग होता था।
  • गुप्तों की तरह ध्वजवाहकअग्रणी सैनिक और विशिष्ट अंगरक्षक दल भी होते थे।


समाज

वर्ण व्यवस्था

  • समाज में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार वर्ण थे।
  • ब्राह्मणों को भूमि दान और विशेषाधिकार दिए जाते थे।

स्त्रियों की स्थिति

  • राजपरिवार की स्त्रियाँ (जैसे प्रभावती गुप्ता) राजनीतिक शक्ति संभाल सकती थीं।
  • उच्च वर्ग की स्त्रियों को शिक्षा और धार्मिक कर्मों में भाग लेने का अवसर मिलता था।

ग्रामीण जीवन

  • गाँव आत्मनिर्भर थे — कृषि, पशुपालन, बुनाई, मृदभांड निर्माण आदि प्रमुख व्यवसाय।


धर्म

  • वाकाटक शासक वैदिक धर्म के अनुयायी थे, परंतु बौद्ध धर्म को भी संरक्षण देते थे।
  • प्रभाकरसेन प्रथम ने वैष्णव धर्म अपनाया और वैदिक यज्ञ करवाए।
  • हर्षसेन के काल में बौद्ध विहार और स्तूपों का निर्माण हुआ।
  • प्रभावती गुप्ता वैष्णव मत की अनुयायी थीं।


कला और संस्कृति

अजंता गुफाएँ

  • वाकाटक काल की कला का सर्वोत्तम उदाहरण अजंता की गुफाएँ हैं।
  • गुफा संख्या 16 और 17 विशेष रूप से हर्षसेन के संरक्षण में बनीं।
  • चित्रकला में बौद्ध जातक कथाओं, राजदरबार, उत्सव और प्रकृति का अद्भुत चित्रण।
  • स्थापत्य में स्तंभयुक्त मंडप, तोरण द्वार और सुंदर मूर्तिकला।

साहित्य

  • प्रभाकरसेन द्वितीय का सेतुबन्ध काव्य प्रसिद्ध है।
  • सार्वभौम जैसे कवि संस्कृत साहित्य में प्रसिद्ध हुए।


पतन के कारण

वाकाटक साम्राज्य का पतन पाँचवीं शताब्दी के अंत में हुआ। प्रमुख कारण —

1. उत्तरी गुप्त साम्राज्य का पतन — राजनीतिक सहयोग खत्म हो गया।

2. दक्षिण के चालुक्य और राष्ट्रकूट आक्रमण

3. आंतरिक कलह — दोनों शाखाओं में एकता की कमी।

4. अत्यधिक धार्मिक और सांस्कृतिक खर्च, जिससे आर्थिक स्थिति कमजोर हुई।

5. प्रशासनिक नियंत्रण का कमजोर होना।


वाकाटक राजवंश का महत्व

  • गुप्त और दक्षिण भारतीय संस्कृतियों के बीच संपर्क स्थापित करना।
  • अजंता जैसी अमर कला धरोहर का संरक्षण।
  • संस्कृत साहित्य और वैदिक परंपरा का विस्तार।
  • महिला शासन (प्रभावती गुप्ता) का ऐतिहासिक उदाहरण।

 

Note:-

  • वाकाटक राजवंश की स्थापना 255 ई. के लगभग विन्ध्यशक्ति नामक व्यक्ति ने की थी। इसके पूर्वज सातवाहनों के अधीन बरार (विद्भ) के स्थानीय शासक थे।
  • विन्ध्यशक्ति के पश्चात उसका पुत्र प्रवरसेन प्रथम (275-335 ई.) शासक हुआ। वाकाटक वंश का वह अकेला ऐसा शासक था जिसने सम्राट की उपाधि धारण की थी। पुराणों से पता चलता है कि इसने चार अश्वमेध यज्ञ किया था ।
  • प्रवरसेन के पश्चात वाकाटक साम्राज्य दो शाखाओ में विभक्त हो गया-प्रधान शाखा तथा बासीय (वरसगुल्म) शाखा। दोनों शाखाएँ समानान्तर रूप से शासन किया।
  • प्रधान शाखा के प्रमुख राजा-रूद्रसेन प्रथम (335-360ई.), प्रभावती गुप्ता का संरक्षण काल (390-410), प्रवरसेन द्वितीय (41-440 ई.) नरेन्द्र सेन (440-460 ई.), पृथ्वीसेन द्वितीय (460-480 ई.)
  • गुप्त शासक चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी पुत्री प्रभावती गुप्ता का विवाह वाकाटक नरेश रूद्रसेन द्वितीय से किया वाकाटकों का राज्य गुप्त एवं शक राज्यों के बीच था। राज्यों पर विजय प्राप्त करने के लिए चन्द्रगुप्त-II ने इस संबंध को स्थापित किया था बिवाह के समय बाद रूद्रसेन द्वितीय की मृत्यु हो गई। चूँकि उसके दोनों पुत्र दिवाकर सेन एवं दमोदर सेन अवयस्क थे अतः प्रभावतीगुप्ता ने शासन संभाला। यह काल वाकाटक गुप्त संबंध का स्वर्णकाल रहा।
  • प्रभावतीगुप्ता के संरक्षण काल के बाद उसका कनिष्ठ पुत्र दमोदर सेन प्रवरसेन द्वितीय के नाम से गह्दी पर बैठा।

 

बासीम शाखा के बाकाटक

 वाकाटक वंश की इस शाखा की स्थापना 330 ई. में सम्राट प्रवरसेन के छोटे पुत्र सर्वसेन ने की थी। उसने वत्सगुल्म नामक स्थान पर एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। वत्सगुल्म महाराष्ट्र के अकोला जिले में आधुनिक बासीम में स्थित था। 

  • बासीम शाखा के प्रमुख राजा सर्वसेन, विन्ध्यशक्ति द्वितीय (350-400 ई.), प्रवरसेन द्वितीय (400-415ई.), हरिषेण (475-510ई.)
  • हरिषेण बासीम शाखा का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक था यह वाकाटक वंश का अंतिम शञात शासक है।
  • वाकाटक वंश के राजा प्रवरसेन द्वितीय ने मराठी प्राकृतकाव्य सेतुबन्ध की रचना की तथा सर्वसेन ने हरिविजय नामक प्राकृत काव्य-प्रथ लिखा।
  • संस्कृत की वैदरभी शैली का पूर्ण विकास वाकाटक नरेशों के दरबार में हुआ।
  • कुछ विद्वानों का मत है कि चन्द्रगुप्त द्वितीय के राजकवि कालिदास ने कुछ समय तक प्रवरसेन द्वितीय की राजसभा में निवास किया था। वहाँ उन्होंने उसके सेतुबन्धु  का संशोधन किया तथा वैदर्भी  शैली में अपना काव्य मेघदूत लिखा ।
  • वाकाटक नरेश ब्राह्मण धर्मालम्बी थे वे शिव और विष्णु के अनन्य उपासक थे।
  • वाकाटक नरेश पृथ्वीसेन द्वितीय के सामन्त व्याध्रादेव  ने नचना के मंदिर का निर्माण करवाया ।.
  • अजन्ता का सोलहवा तथा सत्रहवों गुहा विहार और उन्नीसवें गुहा चैत्य   का निर्माण वाकटकों के शासन काल में हुआ।

 

 वाकाटक राजवंश – MCQ प्रश्नोत्तर

वाकाटक राजवंश के संस्थापक कौन थे?
a) प्रभाकरसेन प्रथम
b) विंध्यशक्ति
c) हर्षसेन
d) रुद्रसेन द्वितीय
उत्तर: b) विंध्यशक्ति

 

वाकाटक राजवंश की प्रारंभिक राजधानी कहाँ थी?
a) अमरावती
b) प्रवरपुर
c) नंदिवर्धन
d) वासिम
उत्तर: c) नंदिवर्धन

 

प्रभाकरसेन प्रथम किस यज्ञ के लिए प्रसिद्ध थे?
a) अश्वमेध
b) वजपेय
c) सोमयज्ञ
d) गवयज्ञ
उत्तर: a) अश्वमेध

 

वाकाटक काल में कौन-सा धर्म सबसे अधिक प्रचलित था?
a) जैन धर्म
b) बौद्ध धर्म
c) वैदिक/हिन्दू धर्म
d) सूफी मत
उत्तर: c) वैदिक/हिन्दू धर्म

 

गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री का नाम क्या था?
a) कुमारदेवी
b) प्रभावती गुप्ता
c) धर्मा देवी
d) रत्नावली
उत्तर: b) प्रभावती गुप्ता

 

प्रभावती गुप्ता का विवाह किससे हुआ था?
a) प्रभाकरसेन द्वितीय
b) रुद्रसेन द्वितीय
c) विंध्यशक्ति
d) हर्षसेन
उत्तर: b) रुद्रसेन द्वितीय

 

वाकाटक साम्राज्य की दूसरी राजधानी कौन-सी थी?
a) अमरावती
b) वासिम
c) उज्जैन
d) कौशाम्बी
उत्तर: b) वासिम

 

प्रभाकरसेन द्वितीय का प्रसिद्ध संस्कृत ग्रंथ कौन-सा है?
a) मेघदूत
b) रघुवंश
c) सेतुबन्ध
d) हर्षचरित
उत्तर: c) सेतुबन्ध

 

अजंता की गुफा संख्या 16 और 17 किसके काल में बनीं?
a) प्रभाकरसेन प्रथम
b) हर्षसेन
c) सार्वभौम
d) रुद्रसेन द्वितीय
उत्तर: b) हर्षसेन

 

वाकाटक साम्राज्य का पतन लगभग किस शताब्दी में हुआ?
a) चौथी
b) पाँचवीं
c) छठी
d) सातवीं
उत्तर: b) पाँचवीं

 

वाकाटक राजवंश की स्थापना कब मानी जाती है?
a) 100 ई.
b) 150 ई.
c) 250 ई.
d) 300 ई.
उत्तर: c) 250 ई.

 

विंध्यशक्ति किस उपासना से जुड़े थे?
a) विष्णु
b) शक्ति
c) शिव
d) सूर्य
उत्तर: b) शक्ति

 

किस शासक के बाद वाकाटक साम्राज्य दो शाखाओं में बँट गया?
a) विंध्यशक्ति
b) रुद्रसेन द्वितीय
c) प्रभाकरसेन प्रथम
d) हर्षसेन
उत्तर: c) प्रभाकरसेन प्रथम

 

नंदिवर्धन शाखा और वासिम शाखा के विभाजन का मुख्य कारण क्या था?
a) गुप्त साम्राज्य का दबाव
b) प्रशासनिक सुविधा
c) उत्तराधिकार विवाद
d) आर्थिक संकट
उत्तर: c) उत्तराधिकार विवाद

 

सार्वभौम किस क्षेत्र से जुड़े साहित्यकार थे?
a) तेलुगु
b) संस्कृत
c) प्राकृत
d) पाली
उत्तर: b) संस्कृत

 

वाकाटक राजाओं द्वारा प्रयुक्त प्रमुख धातु मुद्रा कौन-सी थी?
a) सोना
b) चाँदी
c) ताँबा
d) मिश्रधातु
उत्तर: a) सोना

 

अजंता गुफाओं में कौन-सा विषय प्रमुख रूप से चित्रित है?
a) महाभारत कथाएँ
b) रामायण कथाएँ
c) जातक कथाएँ
d) पौराणिक देवी-देवता
उत्तर: c) जातक कथाएँ

 

प्रभावती गुप्ता किस धर्म की अनुयायी थीं?
a) बौद्ध धर्म
b) वैष्णव धर्म
c) शैव धर्म
d) जैन धर्म
उत्तर: b) वैष्णव धर्म

 

वाकाटक राजाओं का मुख्य राजस्व स्रोत क्या था?
a) व्यापार कर
b) भूमि कर
c) लूट
d) दान
उत्तर: b) भूमि कर

 

वाकाटक शासनकाल में ग्राम प्रशासन का प्रमुख कौन होता था?
a) ग्रामिक
b) विशयपति
c) देशपति
d) महामात्य
उत्तर: a) ग्रामिक

 

 

प्रभाकरसेन प्रथम ने कितने अश्वमेध यज्ञ किए थे?
a) दो
b) तीन
c) चार
d) पाँच
उत्तर: c) चार

 

सेतुबन्ध’ महाकाव्य किसने लिखा?
a) प्रभाकरसेन प्रथम
b) प्रभाकरसेन द्वितीय
c) हर्षसेन
d) सार्वभौम
उत्तर: b) प्रभाकरसेन द्वितीय

 

वाकाटक साम्राज्य का पतन मुख्यतः किसके कारण हुआ?
a) चालुक्य आक्रमण
b) पल्लव आक्रमण
c) राष्ट्रकूट आक्रमण
d) उपरोक्त सभी
उत्तर: d) उपरोक्त सभी

 

वाकाटक काल के प्रसिद्ध स्तूप किस स्थान पर हैं?
a) नालंदा
b) साँची
c) अजंता
d) अमरावती
उत्तर: c) अजंता

 

वाकाटक राजाओं की आधिकारिक भाषा क्या थी?
a) पाली
b) संस्कृत
c) प्राकृत
d) तेलुगु
उत्तर: b) संस्कृत

 

हर्षसेन किस शाखा के शासक थे?
a) नंदिवर्धन शाखा
b) वासिम शाखा
c) कांची शाखा
d) विदर्भ शाखा
उत्तर: b) वासिम शाखा

 

वाकाटक प्रशासन में ‘विशय’ का क्या अर्थ था?
a) गाँव
b) जिला
c) प्रदेश
d) कर
उत्तर: b) जिला

 

विंध्यशक्ति के समय वाकाटक राज्य का मुख्य क्षेत्र कौन-सा था?
a) विदर्भ
b) मालवा
c) बुंदेलखंड
d) महाकौशल
उत्तर: a) विदर्भ

 

प्रभाकरसेन द्वितीय ने राजधानी को किस स्थान पर स्थानांतरित किया?
a) नंदिवर्धन से वासिम
b) नंदिवर्धन से प्रवरपुर
c) वासिम से नंदिवर्धन
d) प्रवरपुर से अमरावती
उत्तर: b) नंदिवर्धन से प्रवरपुर

 

वाकाटक काल की कला किस शैली से संबंधित थी?
a) गंधार
b) मथुरा
c) दक्कनी
d) अमरावती
उत्तर: c) दक्कनी

 

 

सम्राट’ उपाधि धारण करने वाले वाकाटक शासक कौन थे?
a) विंध्यशक्ति
b) प्रभाकरसेन प्रथम
c) हर्षसेन
d) रुद्रसेन द्वितीय
उत्तर: b) प्रभाकरसेन प्रथम

 

वाकाटक शासनकाल में ‘देश’ शब्द का अर्थ था —
a) ग्राम
b) जिला
c) प्रांत/प्रदेश
d) साम्राज्य
उत्तर: c) प्रांत/प्रदेश

 

वाकाटक साम्राज्य के पतन के समय प्रमुख दक्षिणी शक्ति कौन थी?
a) चालुक्य
b) पल्लव
c) राष्ट्रकूट
d) सातवाहन
उत्तर: a) चालुक्य

 

अजंता गुफाओं में किस प्रकार की चित्रकला पाई जाती है?
a) भित्ति चित्रकला
b) पेंटिंग ऑन कैनवास
c) मिनिएचर पेंटिंग
d) टेम्परा पेंटिंग
उत्तर: a) भित्ति चित्रकला

 

प्रभाकरसेन द्वितीय ने किस धर्म को संरक्षण दिया?
a) जैन
b) बौद्ध
c) वैष्णव
d) शैव
उत्तर: b) बौद्ध

 

वाकाटक राजाओं की मुद्राओं पर किसकी छवि प्रमुख रूप से अंकित थी?
a) विष्णु
b) शिव
c) देवी
d) सूर्य
उत्तर: c) देवी

 

वाकाटक काल में व्यापार किस मार्ग से अधिक होता था?
a) समुद्री मार्ग
b) स्थलीय मार्ग
c) दोनों
d) कोई नहीं
उत्तर: c) दोनों

 

वाकाटक साम्राज्य में ग्राम स्तर पर न्याय कौन देता था?
a) ग्रामिक
b) विशयपति
c) देशपति
d) अमात्य
उत्तर: a) ग्रामिक

 

वाकाटक काल में शिक्षा का मुख्य केंद्र कहाँ था?
a) नालंदा
b) प्रवरपुर
c) वर्धा
d) अमरावती
उत्तर: b) प्रवरपुर

 

वाकाटक काल में सबसे अधिक भूमि किस वर्ग को दान में दी जाती थी?
a) क्षत्रिय
b) ब्राह्मण
c) वैश्य
d) शूद्र
उत्तर: b) ब्राह्मण

 

 

विंध्यशक्ति का शासन काल लगभग कब था?
a) 230-250 ई.
b) 250-270 ई.
c) 270-300 ई.
d) 300-320 ई.
उत्तर: b) 250-270 ई.

 

वाकाटक साम्राज्य का उत्कर्ष काल किसके समय माना जाता है?
a) हर्षसेन
b) रुद्रसेन द्वितीय
c) प्रभाकरसेन प्रथम
d) सार्वभौम
उत्तर: c) प्रभाकरसेन प्रथम

 

अजंता गुफाओं का निर्माण किस धर्म के प्रचार हेतु हुआ?
a) वैष्णव
b) बौद्ध
c) शैव
d) जैन
उत्तर: b) बौद्ध

 

नंदिवर्धन शाखा की प्रमुख रानी कौन थीं?
a) कुमारदेवी
b) प्रभावती गुप्ता
c) रत्नावली
d) महादेवी
उत्तर: b) प्रभावती गुप्ता

 

वाकाटक काल की सामाजिक संरचना किस सिद्धांत पर आधारित थी?
a) वर्ण व्यवस्था
b) जाति व्यवस्था
c) वर्ग व्यवस्था
d) साम्यवादी व्यवस्था
उत्तर: a) वर्ण व्यवस्था

 

वाकाटक प्रशासन में ‘विशयपति’ का पद किसके समान था?
a) ग्राम प्रधान
b) जिला अधिकारी
c) मंत्री
d) राजा
उत्तर: b) जिला अधिकारी

 

वाकाटक साम्राज्य के पतन का मुख्य आंतरिक कारण क्या था?
a) आर्थिक संकट
b) धार्मिक कट्टरता
c) शाखाओं में कलह
d) भ्रष्टाचार
उत्तर: c) शाखाओं में कलह

 

वाकाटक कला में कौन-सा तत्व प्रमुख था?
a) यथार्थवाद
b) धार्मिक भावनाएँ
c) अमूर्त कला
d) प्रतीकवाद
उत्तर: b) धार्मिक भावनाएँ

 

वाकाटक काल में प्रमुख व्यापारिक वस्तु कौन-सी थी?
a) मसाले
b) वस्त्र
c) रत्न और हाथीदाँत
d) अनाज
उत्तर: c) रत्न और हाथीदाँत

 

वाकाटक साम्राज्य का अंतिम प्रमुख शासक कौन था?
a) प्रभाकरसेन द्वितीय
b) हर्षसेन
c) सार्वभौम
d) रुद्रसेन द्वितीय
उत्तर: b) हर्षसेन