उत्पत्ति
और प्रारंभिक संदर्भ
- चोल वंश का उल्लेख संगम साहित्य में मिलता
है, जो
उन्हें तमिल क्षेत्र के तीन प्रमुख राजवंशों (चोल, पांड्य, चेरा) में से एक बताता है।
- चोल वंश की उत्पत्ति तमिलनाडु के कावेरी नदी
के आसपास के क्षेत्र से हुई।
- उनकी राजधानी प्रारंभ में उरैयूर थी, बाद में तंजावुर और गंगईकोंडा चोलपुरम।
संगम
काल के चोल
- संगम साहित्य के अनुसार, प्रारंभिक चोल शासक "करिकाल चोल"
सबसे प्रसिद्ध थे।
- करिकाल चोल ने कावेरी डेल्टा में सिंचाई
व्यवस्था विकसित की और कल्लनई (ग्रैंड एनीकट) का निर्माण करवाया।
- इस काल में चोल शक्ति समुद्री व्यापार के
लिए प्रसिद्ध थी।
मध्यवर्ती
पतन
- संगम काल के बाद चोल वंश लगभग 3री से 8वीं शताब्दी तक कमजोर हो गया।
- इस अवधि में पल्लव, पांड्य और अन्य स्थानीय राजाओं ने चोल
क्षेत्र पर कब्जा किया।
पुनरुत्थान
- 9वीं शताब्दी में विजयालय चोल ने तंजावुर को जीतकर चोल वंश का पुनरुत्थान
किया।
- विजयालय के बाद आदित्य प्रथम और फिर राजराजा प्रथम ने चोल शक्ति को चरम पर पहुंचाया।
चोल वंश– चरमकाल और प्रमुख शासक
राजराजा
चोल प्रथम (985–1014 ई.)
- चोल वंश के सबसे महान शासकों में से एक।
- राजधानी तंजावुर से शासन किया।
- पांड्य, चेरा और श्रीलंका के उत्तरी भाग
(अनुराधापुरा) पर विजय प्राप्त की।
- नौसेना का विस्तार कर मालदीव द्वीप पर कब्जा किया।
- प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर) का निर्माण करवाया — यह यूनेस्को
विश्व धरोहर स्थल है।
राजेन्द्र
चोल प्रथम (1014–1044 ई.)
- राजराजा चोल के पुत्र और उत्तराधिकारी।
- राजधानी गंगईकोंडा चोलपुरम बनाई।
- गंगा घाटी तक विजय अभियान (महान उत्तरी
अभियान) — "गंगईकोंडा" की उपाधि प्राप्त।
- श्रीविजय साम्राज्य (मलय द्वीप समूह) पर
नौसैनिक आक्रमण।
- प्रशासनिक दक्षता और जल-प्रबंधन के लिए
प्रसिद्ध।
राजाधिराज
चोल प्रथम (1044–1054 ई.)
- चालुक्यों के साथ लगातार युद्ध किए।
- कल्याणी चालुक्यों के विरुद्ध युद्ध में
वीरगति प्राप्त।
राजेन्द्र
चोल द्वितीय (1054–1063 ई.)
- चालुक्यों पर कई विजय प्राप्त की।
- साम्राज्य की स्थिरता बनाए रखी।
कुलोत्तुंग
चोल प्रथम (1070–1120 ई.)
- चोल वंश का अंतिम महान शासक।
- चोल साम्राज्य का विस्तार पूर्वी भारत और
दक्षिण-पूर्व एशिया तक।
- प्रशासकीय सुधार और व्यापार-विकास के लिए
प्रसिद्ध।
चोल
साम्राज्य का प्रभाव
- चोल काल में दक्षिण भारत की नौसैनिक शक्ति
अपने चरम पर थी।
- दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ सांस्कृतिक और
व्यापारिक संबंध अत्यधिक मजबूत हुए।
- मंदिर-निर्माण, मूर्तिकला और भित्तिचित्रकला में स्वर्ण
युग।
चोल वंश –संस्कृति, प्रशासन और पतन
प्रशासनिक व्यवस्था
- चोल साम्राज्य का प्रशासन केंद्र, प्रांत (मंडल), जिलों (नाडु), गाँव के स्तर पर विभाजित था।
- ग्राम सभा (सभा/उर) —
गाँव के प्रशासन की प्रमुख इकाई, जिसमें सदस्य भूमि-स्वामी होते थे।
- कर व्यवस्था सुव्यवस्थित थी — भूमि कर
प्रमुख राजस्व स्रोत।
- नौसेना और सेना का अलग विभाग था।
कला और
वास्तुकला
- चोल काल द्रविड़ शैली (Dravidian
Architecture) के मंदिर
निर्माण का स्वर्ण युग था।
- बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर), गंगईकोंडाचोलपुरम का मंदिर, और एयरावतेश्वर मंदिर (दारासुरम) प्रमुख उदाहरण हैं।
- कांस्य मूर्तिकला में नटराज की प्रतिमा
विश्व प्रसिद्ध।
- भित्तिचित्र (फ्रेस्को पेंटिंग) और देव
प्रतिमाओं में सूक्ष्मता का अद्भुत स्तर।
समाज
और अर्थव्यवस्था
- कृषि अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार — कावेरी
डेल्टा को “धान का कटोरा” कहा जाता था।
- दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ मसाले, रत्न, वस्त्र और धातु का व्यापार।
- समाज में ब्राह्मणों और मंदिरों की बड़ी
भूमिका।
- शिक्षा केंद्र — कांचीपुरम, तंजावुर आदि।
धर्म
और संस्कृति
- मुख्यतः शैव धर्म का संरक्षण, साथ ही वैष्णव और जैन धर्म को भी संरक्षण।
- भक्ति आंदोलन के नायक — नयनार और आळवार संत।
- साहित्य — तमिल भाषा में धार्मिक और
सांस्कृतिक रचनाएँ, संस्कृत
में भी विद्वता का विकास।
पतन के
कारण
- 12वीं सदी के बाद चालुक्यों और पांड्यों का
पुनरुत्थान।
- होयसला और सेलब्राह्मण राज्यों का उदय।
- लगातार युद्धों से आर्थिक कमजोरी।
- अंततः 13वीं सदी में चोल साम्राज्य पांड्यों के अधीन
हो गया।
Note:-
- 9वीं शताब्दी में चोल वंश पल्लवों के ध्वंसावशेषों पर स्थापित हुआ। इस वंश के संस्थापक विजयालय (850-87 ई.) थे जिसकी राजधानी तांजाय (तंजौर या तंजावूर) था। तंजावूर का वास्तुकार कुंजरमल्लन राजराज पेरूथच्चन था ।
- विजयालय ने नरकेसरी की उपाधि धारण की और निशुम्भसूदिनी देवी का मंदिर बनवाया।
- चोलों का स्वतंत्र राज्य आदित्य प्रथम ने स्थापित किया।
- पल्लवों पर विजय पाने के उपरान्त आदित्य प्रथम ने कोदण्डराम की उपाधि धारण की।
- चोल वंश के प्रमुख राजा थे--परांतक-I, राजराज-I, राजेन्द्र-I, राजेन्द्र-II एवं कुलोत्तुंग।
- तक्कोलम के युद्ध में राष्ट्रकूट नरेश कृष्ण-III ने परांतक-I को पराजित किया। इस युद्ध में परांतक-I का बड़ा लड़का राजादित्य मारा गया।
- राजराज प्रथम ने श्रीलंका पर आक्रमण किया। वहाँ के राजा महिम-V को भागकर श्रीलंका के दक्षिण जिला रोहण में शरण लेनी पड़ी ।
- राजराज-I श्रीलंका के विजित प्रदेशों को चोल साम्राज्य का एक नया प्रांत मुम्ड़िचोलमंडलम बनाया और पोलन्नरुवा को इसकी राजधानी बनाया।
- राजराज-I शैव धर्म का अनुयायी था। इसने तंजौर में राजराजेश्वर का शिवमंदिर बनाया।
- चोल साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार राजेन्द्र प्रथम के शासनकाल में हुआ । बंगाल के पाल शासक महिपाल को पराजित करने के बाद राजेन्द्र प्रथम ने गंगैकोडचोल की उपाधि धारण की और नवीन राजधानी गंगैकोड चोलपुरम् के निकट चोलगंगम नामक विशाल तालाब का निर्माण करवाया।
चोल काल में भूमि के प्रकार
- वेल्लनवगाई : गैर ब्राह्मण किसान स्वामी की भूमि ।
- ब्रह्मदेय ब्राह्मणों को उपहार में दी गई भूमि ।
- शालाभोग : किसी विद्यालय के रख-रखाव की भूमि ।
- देवदान या तिरुनमटड्क्कनी : मंदिर को उपहार में दी गई भूमि ।
- पल्लिच्चंदम: जैन संस्थानों को दान दी गई भूमि ।
नोट : गजनी का सुल्तान महमूद राजेन्द्र प्रथम का
समकालीन था ।
- राजेन्द्र-II ने प्रकेसरी की एवं वीर राजेन्द्र ने राजकेसरी की उपाधि धारण की। चोल वंश का अंतिम राजा राजेन्द्र-II था ।
- चोलों एवं पश्चिमी चालुक्य के बीच शांति स्थापित करने में गोवा के कदम्ब शासक जयकेस प्रथम ने मध्यस्थ की भूमिका निभायी थी ।
- विक्रम चोल अभाव एवं अकाल से ग्रस्त गरीब जनता से राजस्व वसूल कर चिदंबरम् मंदिर का विस्तार करवा रहा था ।
- कलोतुंग-II ने चिदम्बरम् मंदिर में स्थित गोविन्दराज (विष्णु) की मूर्ति को समुद्र में फेंकवा दिया। कालान्तर में वैष्णव आचार्य
- रामानुजाचार्य ने उक्त मूर्ति का पुनरुद्धार किया और उसे तिरुपति के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित किया।
- चोल प्रशासन में भाग लेने वाले उच्च पदाधिकारियों को पेरुन्दरम् एवं निम्न श्रेणी के पदाधिकारियों को शेरुन्दरन कहा जाता था।लेखों में कुछ उच्चाधिकारियों को उड़नकूटम् कहा गया है जिसका अर्थ है सदा राजा के पास रहने वाला अधिकारी।
- सम्पूर्ण चोल साम्राज्य 6 प्रांतों में विभक्त था। प्रांत को मंडलमू कहा जाता था। मंडलम् कोट्टम् में, कोट्टम् नाडु में एवं नाडु कई कुर्रमों में विभक्त था।
- नाडु की स्थानीय सभा को नाटूर एवं नगर की स्थानीय सभा को नगरतार कहा जाता था।
- बेल्लाल जाति के धनी किसानों को केन्द्रीय सरकार की देख रेख में नाडु के काम-काज में अच्छा-खासा नियंत्रण हासिल था । उनमें से कई धनी भू-स्वामियों को चोल राजाओं के सम्मान के रूप में मुवेदवेलन (तीन राजाओं को अपनी सेवाएँ प्रदान करने वाला वेलन या किसान) अरइयार (प्रधान) जैसी उपाधियाँ दी उन्हें केन्द्र में महत्वपूर्ण राजकीय पद सौंपे।
- स्थानीय स्वशासन चोल प्रशासन की मुख्य विशेषता थी।
- उर सर्वसाधारण लोगों की समिति थी, जिसका कार्य होता था सार्वजनिक कल्याण के लिए तालाबों और बगीचों के निर्माण हेतु गाँव की भूमि का अधिग्रहण करना।
- सभा या महासभा : यह मूलतः अग्रहारों और ब्राह्मण बस्तियों की सभा थी, जिसके सदस्यों को पेरुमक्कल कहा जाता था। यह सभा वरियम नाम की समितियों के द्वारा अपने कार्य को संचालित करती थी। सभा की बैठक गाँव में मंदिर के निकट वृक्ष के नीचे या तालाब के किनारे होती थी। व्यापारियों की सभा को नगरम कहते थे।
- चोल काल में भूमिकर उपज का 1/3 भाग हुआ करता था।
- गाँव में कार्यसमिति की सदस्यता के लिए जो वेतनभोगी कर्मचारी रखे जाते थे, उन्हें मध्यस्थ कहते थे ।
उत्तरमेरुर अभिलेख के अनुसार सभा की
सदस्यता
2. उनके पास अपना घर होना चाहिए ।
3. उनकी उम्र 35 से 70 के बीच होनी चाहिए।
4. उन्हें वेदों का ज्ञान होना चाहिए।
5 उन्हें प्रशासनिक मामलों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए और ईमानदार होना चाहिए।
6. यदि कोई पिछले तीन सालों में किसी समिति का सदस्य रहा है तो वह किसी और समिति का सदस्य नहीं बन सकता ।
- चोल सेना का सबसे संगठित अंग था-पदाति सेना ।
- चोल काल में कलजु सोने के सिक्के थे ।
- तमिल कवियों में जयन्गोंदर प्रसिद्ध कवि था, जो कुलोतुँग प्रथम का राजकवि था । उसकी रचना है-कलिंगतुपर्णि
- कंबन, औट्टक्कुट्टन और पुगलेंदि को तमिल साहित्य का त्रिरत्न कहा जाता है।
- पंप, पोन्न एवं रन्न कन्नड़ साहित्य के त्रिरल्न माने जाते हैं।
- पर्सी ब्राऊन ने तंजौर के बृहदेश्वर मंदिर के विमान को भारतीय वास्तुकला का निकष माना है। चोलकालीन नटराज प्रतिमा को चोल कला का सांस्कृतिक सार या निचोड़ कहा जाता है ।
- चोल कांस्य प्रतिमाएँ संसार की सबसे उत्कृष्ट कांस्य प्रतिमाओं में गिनी जाती हैं।
- शैव सन्त इसानशिव पंडित राजेन्द्र-I के गुरु थे।
- चोलकाल (10वीं शताब्दी) का सबसे महत्वपूर्ण बन्दरगाह कावेरीपट्टनम था।
- बहुत बड़ा गाँव, जो एक इकाई के रूप में शासित किया जाता था, तनियर कहलाता था।
- उत्तरमेरूर शिलालेख, जो सभा-संस्था का विस्तृत वर्णन उपस्थित करता है, परांतक प्रथम के शासनकाल से संबंधित है।
- चोलों की राजधानी कालक्रम के अनुसार थी-उरैयूर, तंजौड़, गंगैकोंड, चोलपुरम् एवं काँची ।
- चोल काल में सड़कों की देखभाल बगान समिति करती थी।
- चोलकाल में आम वस्तुओं के आदान प्रदान का आधार धान था ।
- चोल काल के विशाल व्यापारी-समूह निम्न थे-वलंजियार नानादैसी एवं मनिग्रामम् ।
- विष्णु के उपासक अलवार व शिव के उपासक नयनार संत कहलाते थे ।
चोल वंश– MCQ
चोल
वंश की प्रारंभिक राजधानी कौन-सी थी?
a) तंजावुर
b) कांचीपुरम
c) उरैयूर
d) मदुरै
उत्तर: c) उरैयूर
करिकाल
चोल किस निर्माण कार्य के लिए प्रसिद्ध हैं?
a) शोर मंदिर
b) कल्लनई (ग्रैंड एनीकट)
c) बृहदेश्वर मंदिर
d) एयरावतेश्वर मंदिर
उत्तर: b) कल्लनई (ग्रैंड एनीकट)
विजयालय
चोल ने किस शहर को जीतकर चोल वंश का पुनरुत्थान किया?
a) मदुरै
b) तंजावुर
c) कांचीपुरम
d) त्रिचिनापल्ली
उत्तर: b) तंजावुर
राजराजा
चोल प्रथम ने किस द्वीप पर विजय प्राप्त की?
a) श्रीलंका
b) मालदीव
c) लक्षद्वीप
d) अंडमान
उत्तर: b) मालदीव
बृहदेश्वर
मंदिर का निर्माण किसने कराया?
a) करिकाल चोल
b) राजराजा चोल प्रथम
c) राजेन्द्र चोल प्रथम
d) कुलोत्तुंग चोल प्रथम
उत्तर: b) राजराजा चोल प्रथम
“गंगईकोंडा” की उपाधि किसे प्राप्त हुई?
a) राजराजा चोल प्रथम
b) राजेन्द्र चोल प्रथम
c) राजाधिराज चोल प्रथम
d) कुलोत्तुंग चोल प्रथम
उत्तर: b) राजेन्द्र चोल प्रथम
चोल
वंश की समुद्री शक्ति किस क्षेत्र तक फैली थी?
a) फारस
b) दक्षिण-पूर्व एशिया
c) अफ्रीका
d) चीन
उत्तर: b) दक्षिण-पूर्व एशिया
गंगईकोंडा
चोलपुरम की स्थापना किसने की?
a) विजयालय चोल
b) राजराजा चोल प्रथम
c) राजेन्द्र चोल प्रथम
d) कुलोत्तुंग चोल प्रथम
उत्तर: c) राजेन्द्र चोल प्रथम
राजाधिराज
चोल प्रथम किस युद्ध में मारे गए?
a) चालुक्यों के विरुद्ध
b) पांड्यों के विरुद्ध
c) चेरों के विरुद्ध
d) श्रीलंका के विरुद्ध
उत्तर: a) चालुक्यों के विरुद्ध
चोल
प्रशासन में गाँव सभा को क्या कहा जाता था?
a) नाडु
b) उर/सभा
c) मंडल
d) पेरुमंडल
उत्तर: b) उर/सभा
चोल
काल में “नाडु” का क्या अर्थ था?
a) ग्राम सभा
b) जिला
c) प्रांत
d) राजधानी
उत्तर: b) जिला
बृहदेश्वर
मंदिर किस शैली में बना है?
a) नागर शैली
b) द्रविड़ शैली
c) वेसर शैली
d) मिश्र शैली
उत्तर: b) द्रविड़ शैली
राजराजा
चोल प्रथम ने श्रीलंका के किस भाग पर कब्जा किया?
a) दक्षिणी भाग
b) उत्तरी भाग
c) पश्चिमी भाग
d) संपूर्ण द्वीप
उत्तर: b) उत्तरी भाग
चोलों
की प्रमुख भाषा कौन सी थी?
a) संस्कृत
b) कन्नड़
c) तमिल
d) तेलुगु
उत्तर: c) तमिल
“नटराज” की प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा किस काल की है?
a) पल्लव काल
b) चोल काल
c) संगम काल
d) विजयनगर काल
उत्तर: b) चोल काल
राजेन्द्र
चोल प्रथम ने किस विदेशी साम्राज्य पर नौसैनिक आक्रमण किया?
a) सुमात्रा के श्रीविजय साम्राज्य
b) ख्मेर साम्राज्य
c) बर्मा साम्राज्य
d) चंपा साम्राज्य
उत्तर: a) सुमात्रा के श्रीविजय साम्राज्य
कुलोत्तुंग
चोल प्रथम का शासनकाल किस विशेषता के लिए प्रसिद्ध था?
a) केवल युद्ध
b) प्रशासनिक सुधार और व्यापार विकास
c) सांस्कृतिक पतन
d) धार्मिक असहिष्णुता
उत्तर: b) प्रशासनिक सुधार और व्यापार विकास
चोलों
की नौसेना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
a) यूरोप में विजय
b) समुद्री व्यापार और विस्तार
c) अफ्रीका में उपनिवेश बनाना
d) केवल रक्षा
उत्तर: b) समुद्री व्यापार और विस्तार
“गंगईकोंडाचोलपुरम का मंदिर” किसके द्वारा निर्मित था?
a) राजराजा चोल प्रथम
b) राजेन्द्र चोल प्रथम
c) कुलोत्तुंग चोल प्रथम
d) करिकाल चोल
उत्तर: b) राजेन्द्र चोल प्रथम
चोल
वंश के पतन का मुख्य कारण क्या था?
a) भूकंप
b) पांड्यों और होयसलों का उदय
c) अकाल
d) विदेशी आक्रमण
उत्तर: b) पांड्यों और होयसलों का उदय
“धान का कटोरा” किस क्षेत्र को कहा जाता था?
a) गंगा का मैदान
b) कावेरी डेल्टा
c) गोदावरी डेल्टा
d) कृष्णा डेल्टा
उत्तर: b) कावेरी डेल्टा
चोल
काल में “उर” किसे कहा जाता था?
a) गाँव सभा
b) जिला परिषद
c) राजा का दरबार
d) मंदिर समिति
उत्तर: a) गाँव सभा
चोल
काल का प्रसिद्ध व्यापारिक बंदरगाह कौन सा था?
a) मसुलीपटनम
b) कावेरीपट्टिनम
c) कालिकट
d) नागपट्टिनम
उत्तर: b) कावेरीपट्टिनम
चोलों
ने किस धर्म को मुख्य संरक्षण दिया?
a) शैव धर्म
b) बौद्ध धर्म
c) जैन धर्म
d) इस्लाम
उत्तर: a) शैव धर्म
चोलों
के समय दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ किस प्रकार का संबंध था?
a) केवल युद्ध
b) व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
c) धार्मिक संघर्ष
d) कोई संबंध नहीं
उत्तर: b) व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
बृहदेश्वर
मंदिर का शिखर किस प्रकार का है?
a) पिरामिड आकार का
b) गुंबदाकार
c) बेलनाकार
d) गोलाकार
उत्तर: a) पिरामिड आकार का
चोल
वंश के प्रमुख शासकों में “विजयालय चोल” किस शताब्दी में आए?
a) 7वीं सदी
b) 8वीं सदी
c) 9वीं सदी
d) 10वीं सदी
उत्तर: c) 9वीं सदी
चोल
काल में “मंडल” क्या था?
a) प्रांत
b) जिला
c) गाँव
d) मंदिर
उत्तर: a) प्रांत
राजराजा
चोल प्रथम के शासनकाल में सबसे बड़ा धार्मिक निर्माण कौन सा था?
a) शोर मंदिर
b) बृहदेश्वर मंदिर
c) कैलाशनाथ मंदिर
d) एयरावतेश्वर मंदिर
उत्तर: b) बृहदेश्वर मंदिर
राजेन्द्र
चोल प्रथम का “उत्तरी अभियान” कहाँ तक गया था?
a) पंजाब
b) गंगा नदी तक
c) दिल्ली तक
d) अफगानिस्तान तक
उत्तर: b) गंगा नदी तक
चोल
काल में “नाडु” स्तर के अधिकारी को क्या कहा जाता था?
a) नाडुपति
b) मंडलपति
c) ग्रामाधिकारी
d) अधिपति
उत्तर: a) नाडुपति
चोल
वंश के पतन के बाद कौन-सा वंश उभरा?
a) चालुक्य
b) पांड्य
c) विजयनगर
d) चेरा
उत्तर: b) पांड्य
चोल
नौसेना का मुख्य अड्डा कहाँ था?
a) नागपट्टिनम
b) मदुरै
c) कांचीपुरम
d) त्रिचिनापल्ली
उत्तर: a) नागपट्टिनम
चोल
काल में भूमि कर का निर्धारण किस आधार पर होता था?
a) भूमि के आकार और उपज
b) जनसंख्या
c) राजा की इच्छा
d) जलवायु
उत्तर: a) भूमि के आकार और उपज
चोल
वंश के शासक किस उपाधि का प्रयोग करते थे?
a) महाराज
b) परकेसरी
c) देवेंद्र
d) जगतपति
उत्तर: b) परकेसरी
“एयरावतेश्वर मंदिर” किसने बनवाया?
a) राजराजा चोल प्रथम
b) राजेन्द्र चोल प्रथम
c) राजराजा चोल द्वितीय
d) कुलोत्तुंग चोल प्रथम
उत्तर: c) राजराजा चोल द्वितीय
चोल
साम्राज्य का स्वर्ण युग किसके शासनकाल में माना जाता है?
a) विजयालय चोल
b) राजराजा चोल प्रथम और राजेन्द्र चोल
प्रथम
c) कुलोत्तुंग चोल प्रथम
d) करिकाल चोल
उत्तर: b) राजराजा चोल प्रथम और राजेन्द्र चोल प्रथम
चोल
काल में मंदिर किस प्रकार की संस्था थे?
a) केवल धार्मिक केंद्र
b) धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र
c) केवल व्यापार केंद्र
d) केवल शिक्षा केंद्र
उत्तर: b) धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र
राजेन्द्र
चोल प्रथम ने गंगाईकोंडा चोलपुरम में किसके सम्मान में विशाल जलाशय बनवाया?
a) देवी दुर्गा
b) गंगा जल लाने की स्मृति में
c) अपने गुरु के सम्मान में
d) समुद्री विजय की स्मृति में
उत्तर: b) गंगा जल लाने की स्मृति में
चोल
वंश का अंतिम महान शासक कौन था?
a) राजराजा चोल द्वितीय
b) कुलोत्तुंग चोल प्रथम
c) करिकाल चोल
d) राजेन्द्र चोल द्वितीय
उत्तर: b) कुलोत्तुंग चोल प्रथम
चोल
काल में विदेशी व्यापार का मुख्य केंद्र कौन था?
a) मदुरै
b) नागपट्टिनम
c) कावेरीपट्टिनम
d) पत्तनचेरी
उत्तर: c) कावेरीपट्टिनम
चोल
वंश की स्थापना संगम साहित्य में किस राजा से जोड़ी जाती है?
a) करिकाल चोल
b) विजयालय चोल
c) राजराजा चोल प्रथम
d) कुलोत्तुंग चोल प्रथम
उत्तर: a) करिकाल चोल
“ग्रांड एनीकट” किस नदी पर बना है?
a) गोदावरी
b) कृष्णा
c) कावेरी
d) तुंगभद्रा
उत्तर: c) कावेरी
चोलों
का पतन किस शताब्दी में हुआ?
a) 11वीं
b) 12वीं
c) 13वीं
d) 14वीं
उत्तर: c) 13वीं
राजराजा
चोल प्रथम का गुरु कौन था?
a) करिकाल पेरुवलाथन
b) करुवुर देवार
c) अप्पर
d) सुन्दरमूर्ति
उत्तर: b) करुवुर देवार
चोल
काल में सबसे अधिक संरक्षित धर्म कौन सा था?
a) बौद्ध धर्म
b) जैन धर्म
c) शैव धर्म
d) वैष्णव धर्म
उत्तर: c) शैव धर्म
राजेन्द्र
चोल प्रथम के समय चोल साम्राज्य की सीमा कहाँ तक फैली थी?
a) केवल दक्षिण भारत
b) श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक
c) अफ्रीका तक
d) अफगानिस्तान तक
उत्तर: b) श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक
चोल
काल में “परकेसरी” और “राजकेसरी” उपाधियाँ किसके लिए प्रयोग होती थीं?
a) सेना प्रमुख
b) राजा
c) मंत्री
d) व्यापारी
उत्तर: b) राजा
चोलों
की नौसेना किस प्रकार की थी?
a) केवल नदी आधारित
b) समुद्री और नदी दोनों
c) केवल समुद्री
d) केवल रक्षा के लिए
उत्तर: b) समुद्री और नदी दोनों
चोल
वंश के समय किस प्रकार की मूर्तिकला सबसे प्रसिद्ध थी?
a) पत्थर की मूर्तिकला
b) कांस्य मूर्तिकला
c) लकड़ी की मूर्तिकला
d) टेराकोटा मूर्तिकला
उत्तर: b) कांस्य मूर्तिकला
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